हमारी सेवाएँ

मुस्कान डिजाइनिंग

हिन्दी में कुछ मशहूर कहावतें हैं । जैसे ‘मुस्कुराता चेहरा हमेशा सुंदर लगता है’ ‘मुस्कान की लागत कुछ नहीं होती पर इससे मिलता बहुत कुछ है’ ‘जिसके पास दूसरों के लिए मुस्कान की कमी होती है वो सच -मुच ग़रीब होता है’ ।

ये सभी कहावतें ये बयान करती हैं कि हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में मुस्कुराहट की बेहद अहम भूमिका है । परन्तु बहुत लोगों की मुस्कान सुंदर ना होने की वजह से मुस्कुराने से कतराते हैं और से लोग फोटो खिचवाते समय भी अपने दाँतों को छुपाने की कोशिश करते हैं । अच्छे दाँत एवम् मुस्कुराहट ना होने की वजह से कभी कभी हमारे सामाजिक कार्य जैसे विवाह, दोस्ती आदि में भी रुकावट आती है । परंतु अब बिल्कुल भी झिझकने की आवश्यकता नहीं है । ऐसे लोगों के लिए दाँतों के क्षेत्र में हो रही रिसर्च (अनुसंधान) ने नये आयामों को छुआ है । अब हम आपको स्माइल डिजाइनिंग से आपको मनचाही मुस्कान दे सकते हैं। इसमें कुछ निम्नलिखित शामिल हैं –

  • टेढ़े-मेडे दाँतों को सीधा किया जाना ।
  • अगर कोई दाँत कहीं से टूट गया है या सही आकार का नहीं है तो उस पर दाँत के रंग की परत चढ़ाना (वेनीरिंग) ।
  • अगर किसी दाँत का रंग सही नहीं है तो रंग सही करना ।
  • मसूड़ों के रंग में भी सुधार करना ।
  • मसूड़ों के आकार को सुधारना ।
  • जबड़े के आकार को ठीक करना ।

 

वेनीरिंग (दाँतों पर परत चढ़ाना )

यह ज़्यादातर सामने के उन दाँतों पर चढ़ाई जाती है जो मुस्कुराते समय दिखाई देती है । यह बहुत ही पतली परत होती है और दो तरह की होती है-

कॅंपॉज़िट वेनीरिंग – यह दाँत के रंग का पदार्थ होता है जिसे दाँत को तैयार करके उस पर लाइट द्वारा पका कर चिपका दिया जाता है । इसकी आयु (लाइफ) 6 महीने से 5 साल तक होती है ।

पोर्सेलेन वेनीरिंग – यह 0.3 मिमी -0.5 मिमी मोटी (नाख़ून जितनी) दाँत के कलर की परत होती है । जिसे प्रयोगशाला (लैब) में तैयार किया जाता है और इसमें तीन से पाँच दिन का समय लगता है । तैयार परत को एक गोंद द्वारा दाँत पर चिपका दिया जाता है । यह बहुत मजबूत होती है और इस पर 5 साल से लेकर 15 साल तक की स्थानीय (लोकल) से लेकर अंतर्राष्ट्रीय वारंटी होती है । सामान्यता इस परत की उम्र 20-25 साल होती है ।

दाँतों के गहने (डेंटल जवूलरी)

कहा जाता है कि गहना मनुष्य की सुंदरता में चार चाँद लगा देता है । अगर आपके दाँत बहुत खूबसूरत हैं तथा आप चाहते हैं कि इन्हे और खूबसूरत बनाया जाए तो हम आपके दाँतों को दे सकते हैं “गहने ” । यह ख़ासकर उन लोगों के लिए बनाए गये हैं जो भीड़ से अलग दिखना चाहते हैं विशेषत: लड़कियाँ, महिलाएँ, बच्चे एवम् दुल्हनें।

जी हाँ, चौंकिए मत ! आप सही पढ़ रहे हैं कि हम आपके दाँतों को जवाहरातों से सज़ा सकते हैं । ये कई आकारों एवम् रंगों में उपलब्ध हैं । ये सभी के लिए सुरक्षित होते हैं तथा इसे एक गोंद जैसे पदार्थ द्वारा चिपका दिया जाता हैं । सबसे बड़ी बात ये है कि आप इन्हे कभी भी बिना किसी तकलीफ़ के हटवा सकते हैं और इसे लगाने में मात्र 10 मिनिट का समय लगता है ।

“तो अब आप मात्र 10 मिनिट में पा सकते हैं अपने मनपसंद रंग और आकर के दाँतों के गहने ” ।

दंत प्रत्यारोपण (डेंटल इम्प्लान्ट)

दंत प्रत्यारोपण दांतों की एक बनावटी जड़ है । जिसका इस्तेमाल दांतों को फिर से स्थापित करने के लिए किया जाता है । इसका उपयोग असली जैसे दिखने वाले नकली दाँतों को लगाने में किया जाता है । इनमें जड़ें भी होती है जो हड्डी में असली दाँतों की तरह लगी होती हैं ।

सरंचना – यह एक विशेष इम्प्लांट टाइटेनियम स्क्रू (गिट्टी ) होता है जो देखने में दांत की जड़ की तरह लगता है और इसकी सतह खुरदरी होती है।

डेंटल इम्प्लान्ट्स को स्थापित करने के कई तरीके हैं:

  • दांत निकालने के तुरंत बाद दंत प्रत्यारोपण करना ।
  • दांत निकालने के कुछ समय बाद दंत प्रत्यारोपण करना – दांत निकालने के 2 सप्ताह से लेकर 3 महीने बाद ।
  • दांत निकालने के 3 महीने या उससे भी अधिक समय बाद दंत प्रत्यारोपण करना ।

डेंटल इम्प्लान्ट्स को स्थापित करने की समय-सीमा के अनुसार स्थापन (लोडिंग) प्रकिर्या को निम्नलिखित रूपों में वर्गीकृत किया जा सकता है –

  • तत्काल लोडिंग प्रक्रिया
  • प्रारंभिक लोडिंग प्रक्रिया (1 सप्ताह से 12 सप्ताह)
  • विलंबित लोडिंग प्रक्रिया (3 महीने से अधिक)

सफलता दर – दंत प्रत्यारोपण की सफलता ऑपरेटर के कौशल, साईट पर मौजूद हड्डी की गुणवत्ता एवं मात्रा और रोगी की मौखिक स्वच्छता से संबंधित है । आम सहमति है कि दन्त प्रत्यारोपण की सफलता दर लगभग 95% है । इसकी सफलता को निर्धारित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक कारक इम्प्लांट स्थिरता की उपलब्धि और रखरखाव है । स्थिरता को एक आईएसक्यू (इम्प्लांट स्टेबिलिटी कोशेंट) मान के रूप में पेश किया जाता है । ज्यादातर सर्जिकल प्रक्रियाओं में दंत प्रत्यारोपण स्थापन की सफलता में योगदान देने वाले अन्य कारकों में रोगी का सम्पूर्ण सामान्य स्वास्थ्य और श्ल्य चिकित्सा (सर्जरी) के बाद किए जाने वाले देखभाल का अनुपालन शामिल है ।

पूर्ण बत्तीसी या आंशिक बत्तीसी (कम्प्लीट और पार्शियल डेंचर)

पूर्ण बत्तीसी नकली दाँतों का उपर नीचे का पूरा सेट होता है । इसे सी डी (कम्प्लीट डेंचर) भी कहते हैं, जबकि आंशिक बत्तीसी मे दाँतों की संख्या होती है । इसे आर पी डी (रिमूवबल पार्शियल डेंचर) भी कहते हैं ।

पूर्ण या आंशिक बत्तीसी मे दाँत एक प्लास्टिक या धातु (मेटल) के जाल में लगे होते हैं । जो लगभग असली दाँतों जैसे दिखाई देते हैं । इससे आपकी खोई मुस्कान एवम् आत्मविश्वास वापिस लौटता है और आपको मिलती है फिर से सब कुछ चबाने की आज़ादी ।

बत्तीसी का साथ

यदि आपने पहले कभी भी पूर्ण या आंशिक बत्तीसी पहनी है तो आप बिना किसी ज़्यादा दिक्कत के अपनी नई बत्तीसी का आनंद ले सकते हैं । यदि ये आपकी पहली बत्तीसी है तो आपको पहले कुछ दिन कहीं कहीं पर चुभाने का अहसास हो सकता है । ये भी हो सकता है कि आप पहले कुछ दिन सामान्य तरीके से ना खा सके परंतु आपको डरने की बिल्कुल आवश्यकता नही है । कुछ दिनों बाद यह अपने आप ठीक लगाने लगती है और आप ठीक से खाने लगते है । इन सब दिक्कतों से बचाने के लिए ‘दी डेंटिस्ट’ आपको सलाह देते हैं कि आप पहले सप्ताह सिर्फ़ इसे पहनने का अभ्यास करें। इससे खाना एक साप्ताह बाद ही शुरू करें । अगर आप स्थाई (फिक्सड) बत्तीसी पहन रहे हैं तो आप बिना दिक्कत के उसी दिन खाना शुरू कर सकते हैं । हमारा ये प्रयास रहता है कि हम आपके मुँह का पूरा आकलन कर आपको आपके अनुसार ही निर्देश दें ।

पूर्ण बत्तीसी या आंशिक बत्तीसी का रख रखाव –

  • यदि आपने निकालने वाली बत्तीसी लगवाई है तो इसे रात में सोते समाय अवश्य ही मुँह से निकाल के पानी में रखेँ ।
  • इसे आप 24 घंटे ना पहने वरना यह आपकी जबड़े की  हड्डी को नुकसान पहुँच सकता है ।
  • आप जब भी इसके साथ खाना खाएँ उसके तुरंत बाद इसे साफ करके पुनः लगा सकते हैं।
  • इसे साफ करने के लिए आप इसे रात को जिस पानी मे रखें उसमे “फिटटीडेँट डेंचर क्लीनिंग टेबलेट (Fittident Denture Cleaning tablet)” नाम की एक गोली डाल कर रखने पर यह स्वतः ही साफ हो जाती है या आप इसे बर्तन साफ करने वाले साबुन, सर्फ आदि से साफ कर सकते हैं ।
  • यदि आपने ना निकलने वाली बत्तीसी लगवाई है तो उसे आप सामान्य ब्रशिंग से साफ कर सकते हैं ।

दाँत की शल्य चिकत्सा-

दाँतों से जुड़ी शल्य चिकित्सा से ज़्यादातर लोग बहुत डरते हैं । परंतु हमारी देखभाल , कुशल दृष्टिकोण आपको इस प्रक्रिया से जुड़े डर से निजाद देता है ।एक सामान्य दाँतों के अस्पताल में कई प्रकार की शल्य चिक्तिसा होती है । जिनमें से कुछ ओरल सर्जरी के अधीन आती है ।

दाँत निकलवाना

दाँत कई कारण से निकाला जाता है ।इनमें से कुछ कारण निम्न है-

1. आंशिक या पूर्णतया हड्डी मे फँसा दाँत ।

2.पूर्णतया गला हुया दाँत जिसे अन्य किसी भी तरीके से नहीं बचाया जा सकता ।

3.दूध के दाँत जो स्थाई दाँत के आने से बाद में भी मुँह बने हुए हैं ।

4. टेढ़े –मेढ़े दाँतों को सीधा करते समय जगह बनाने के लिए भी दाँत निकले जाते हैं ।

 

बुद्धि या अक्ल दाढ निकालना

यह सबसे ज़्यादा होने वाली दन्त शल्य चिकित्सा  है । अक्ल दाढसामान्यता किशोरावस्था में या 15-20 साल में जबड़े में सबसे पीछे आने वाली दाढ है । ये चार होती है । दो उपर के जबड़े में दाएँ अवम् बाएँ एक -एक तथा दो नीचे के जबड़े में दाएँ अवम् बाएँ एक-एक । बहुत से लोगो में जबड़े में पर्याप्त जगह ना मिलने की वजह से ये दाढ  पूर्णतया नहींआ पाती यानी की हड्डी में फंसी हुई रहती है । जिसके कारण उनके भयंकर दर्द या फिर बार -बार मवाद के साथ सूजन आती है तथा यह पास के दाँत को भी खराब कर देता है या इस दाँत के नीचे गाँठ भी बन सकती है । इन सब परेशानियों से बचने के लिए इसे निकलना अतियावश्यक हो जाता है । इस दाँत को निकालने के लिए एक छोटी सी शल्यक्रिया होती जो मात्र 20-30 मिनिट ही चलती है ।इसे करने से पूर्व हम जबड़े के उस हिस्से को पूर्णतया सुन्न कर लेते हैं ताकि आपको कोई दर्द नहीं हो ।

जबड़े की शल्यक्रिया

जबड़े की शल्य करने की कई सामान्य कारण है ।  जिनमें से कुछ निम्न है-

1.कान के पास स्थित जबड़े के जोड़ मे दर्द का होना या जबड़े का अपने स्थान से हिल जाना (jaw dislocation) ।

2. जबड़े मे  छोटी या बड़ी चोट का लगाना ।

3. दाँतों का सही तरह से ना मिलना (incorrect bite) ।

4. चबाने , खाना खाने , मुँह खोलेने या बंद करने मे परेशानी होना आदि ।

5.दाँत प्रत्यारोपण सर्जरी, गम सर्जरी, बोन ग्राफ्टिंग और साइनस सर्जरी-

दाँत प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए दाँत प्रत्यारोपण पेज देखें ।

6.गम सर्जरी (मसूड़ों की शल्य क्रिया), बोन ग्राफ्टिंग-

हमारे दाँत के आसपास मसूड़े और हड्डी दांतों की दीर्घकालिक स्थिरता, शक्ति, और सुंदरता प्रदान करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । चाहे वे दाँत प्रत्यारोपण द्वारा लगाए गये नकली दाँत हों या फिर असली दाँत । इसीलिए असली दांतो  या प्रत्यारोपित दाँत को मजबूती देने अवम् सुंदर बनाने  के लिए कई बार मसूड़ों की सर्जरी (शल्य) या वहाँ बाहर से हड्डी प्रत्यारोपण करना पड़ता है ।

हमारे विशेष प्रशिक्षण और अनुभव, अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग आपको सुविधा और सुरक्षा की गारंटी देता है । हम अपना कार्य बहुत ही सहज तरीके से करते हैं । ताकि आपको सर्जरी के बाद कोई तकलीफ़ ना हो ।

 

रोग की जाँच -पड़ताल

घातक बीमारियों का कई बार उनके लक्षण द्वारा पता नहीं लगाया जा सकता है । जैसे मुँह में होने वाले कैंसर का कई बार उसके लक्षणों से पता नहीं चलता है । यदि हमें कभी यह लगता है कि आपके मुँह चेहरे या गले में कहीं कैंसर हो सकता है । तो हम बायोप्सी द्वारा उसकी उपयुक्त जाँच करवाते हैं । बायोप्सी एक छोटी सी शल्य क्रिया होती है । जिसमे संदिग्ध हिस्से का टुकड़ा निकाला जाता है ।

 

दाँतों की तारबंदी (Orthodontics )

  • क्या आप हमेशा शीशा देखते वक़्त ये सोचते हैं की काश मेरे दाँत भी सीधे अवम् सुंदर हों ?
  • क्या आप अपने टेढ़े मेढ़े दाँतों को देखकर दुखी होते हैं ?

अगर आपके साथ कोई इस तरह की समस्या है तो आप दाँतों पर तारबंदी के द्वारा अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं । THE DENTIST क्लिनिक पर डॉ अरविंद तारबंदी द्वारा आपके दाँतों को सही स्थिति में लाकर आपकोनई मुस्कान के साथ आत्मसम्मान, आत्मविश्वास अवम् सुन्दरता दे सकते हैं ।

 

दाँतों की तारबंदी की आवश्यक हो सकती है यदि

  • आपके  सारे दाँतों को जबड़े में फिट होने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है ।
  • यदि आपके दूध के दाँत आपके स्थाई दाँत आने के बाद भी मुँह में उपस्थित हैं ।
  • अनमेल या टेढ़े दाँत

 

हम निम्न तरह के उपचार कर सकते हैं-

  • हटाने योग्य प्लेटों (रिमूवबल प्लेट्स) ।
  • फिक्स्ड विस्तारक (फिक्स्ड एक्सपॅनडर) ।
  • दाँतों के बीच की जगह को प्रबंधित करना (स्पेस मेंटयिनर्स) ।
  • बुरी आदत जैसे अंगूठा चूसना,होठ चूसना, मुँह से साँस लेना आदि छुड़वाने के लिए प्लेट लगाना ।
  • फिक्स्ड (स्थाई ) तारबंदी द्वारा दाँत सीधे करना ।

 

दाँतों का  संरेखण (सीधा एक आदर्श चाप-रूप देना )

दाँतों की अंतिम स्थिति आमतौर पर आनुवंशिकी द्वारा निर्धारित हैं । इसके अलावा कई कारक जैसे जीभ अवम् होठों की स्थिति ,बुरी आदतें जैसे अंगूठा चूसना, मुँह से साँस लेना ,दाँतों की भीड़ होना ,किसी दाँत का ना होना या किसी अतिरिक्त दाँत का होना,दाँत का अपने से अन्य स्थिति मे होना,जबड़े की स्थिति मे अंतर होना आदि भी दाँतों के टेढ़ेपन का कारण होते हैं ।आपको यह जानकार शायद आश्चर्य होगा कि सीधे दाँत में टेढ़े मेढ़े दाँतों की बजाए कम कीटाणु लगते हैं ।जब दाँत सीधे अवम् एक चाप में होते हैं तो उन्हे साफ रखना भी आसान होता है । उनके ऊपर जमने वाली खाने अवम् कीटाणु की परत को आसानी से हटाया जा सकता है ।यदि किसी व्यक्ति के दाँत बाहर की तरफ निकले हुए हैं तो  दुर्घटना के समय उनके टूटने की संभावना ज़्यादा रहती है । यदि ऐसे दाँतों को तारबंदी से सही स्थिति में ला दिया जाए तो इनके टूटने की संभवना को कम किया जा सकता है । तारबंदी फिक्स (स्थाई ) या हटा सकने वाली प्लेट द्वारा की जा सकती है ।

 

किस उम्र में आप तारबंदी करवा सकते हैं ?

प्रारंभिक उपचार  7- 9 वर्ष के बच्चों में कर सकते हैं । इसमें अक्सर जबड़े की हड्डीयों को ठीक किया जाता है या कुछ छोटे मोटे संशोधन किए जाते हैं ।

किशोरावस्था में उपचार

ज़्यादातर लोग ऐसे होते हैं । जो अपना अंतिम दूध का दाँत गिरने के बाद ही दाँतों पर तारबंदी करवाते है । यह 11 से 16 साल तक किया जाता है ।  इस उम्र मे दाँत ज़्यादा बड़े होने के कारण जबड़े में पूरे नहीं  आ पाते । इसके लिए फिक्स्ड (स्थाई तारबंदी ) ब्रेसस लगाए जाते हैं ।

वयस्क अवस्था में उपचार

अक्सर इस उम्र में इलाज़ करना बच्चों में इलाज़ करने से ज़्यादा असहज अवम् धीमा होता है । क्यूंकी इस उम्र में हड्डी का विकास धीमा होता है  । साथ ही समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है । ऐसा होने के बावजूद भी इलाज़ के परिणाम देखने लायक होते हैं ।

दाँतों की तारबंदी कैसे काम करती है ?

आपकी पहली मुलाकात मे डॉ अरविंद आपकी चेहरे अवम् दाँतों की पूरी जाँच करेंगे । इस दौरान डॉ आपको आपकी दाँतों से जुड़ी सभी स्मसयाओं को सुनेंगे अवम् उनके बारे मे विस्तार से बताएँगे साथ ही वे आपके उपचार से जुड़े सभी सवालों का जबाब देंगे । इस दौरान दाँतों का x- रे अवम् मॉडल लिए जाते हैं । आपके चेहरे की फोटो ली जाती हीं साथ ही जबड़ों के जोड़ो का भी विस्तृत रिकॉर्ड बनाया जाता है ।

आपकी दूसरी मुलाकात में डॉ अरविंद आपको आपके उपचार के बारे मे पूरी तरह समझाते हैं साथ ही वे आपके उपचार योजना से जुड़े सभी विकल्पों के बारे में बताते हुए आपके सभी सवालों का जबाब देते हैं । साथ ही इस बात पर भी विचारा जाता है कि कितना समय लगेगा । पूरा उपचार बहुत ही धीरे धीरे चलता है । इस दौरान धीरे धीरे कम तीव्रता का बल दाँतों को हड्डी मे गति देता है ।

दाँतों पर लगाया गया ये धीमा बल हड्डी मे स्थांतरित होता है । इससे हड्डी के आकार मे बदलाव आता है साथ ही दाँतों को अपनी नई स्थिति प्राप्त होती है । यह नई स्थिति पूर्णतया डॉक्टर के नियंत्रण मे होती है । अत: जहाँ डॉक्टर को सही स्थिति मिलती है । वहीं इस प्रक्रिया को रोक दिया जाता है ।

एक बार इच्छित स्थिति प्राप्त होने के बाद तार को हटा दिया जाता है परंतु हड्डी की परिपक्वता से पहले उसे इसी नई स्थिति मे दाँतों को रखना पड़ता है । इसलिए तार उतारने के बाद बिना दाँतों के पीछे एक तार लगा दी जाती है । जिसे retention wire (अवरोधन तार ) कहते है ।इस प्रकार हड्डी को नया आकार अवम् दाँतों को नई स्थिति प्रदान किया जाता है ।

पूरी प्रक्रिया के दौरान आपके दाँतों अवम् मसूड़ों का पूरा ख्याल रखा जाता है ।  साथ ही THE DENTIST यह भी ख्याल रखते हैं कि आपके लिए ये सारा उपचार महँगा ना पड़े । इसके लिए वे आपको उपचार के दौरान किसी भी नईसमस्या के होने से बचाते हैं । इस सारी प्रक्रिया द्वारा मिलती है

“ आपको नई पहचान अवम् सुंदर मुस्कान “

 

 

रोगनिरोधी दन्तचिकित्सा ( preventive dentistry)

रोकथाम इलाज से बेहतर है”

हो सकता है भगवान ने आपको मोतियों जैसे सुंदर दाँतों का नायाब तोफा बक्षा हो या हो सकता है आपने बहुत सारा उपचार लेकर अपनी मुस्कान को बहुत सुन्दर बनाया हो पर इस सुंदर मुस्कान अवम् मोतियों जैसी मुस्कान को हमेशा ही ऐसा बनाए रखने के लिए ज़रूरी है – इसका अच्छे से रख -रखाव और नियमित जाँच ।

आधुनिक शोधों से पता चला है की आपके दाँतों और आपके सामान्य स्वास्थ्या यानी की  रक्तचाप ,दिल की बीमारी ,मधुमेह रोग,आसमयिक जन्म आदि  में गहरा संबध होता है ।

THE DENTIST आपके लिए यह सुनिश्चित करते हैं कि आपको कोई भी संभावित दाँतों की बीमारी ना हो । इसके लिए हम आपको आपके दाँतों की स्थिति की पूरी जानकारी देते हैं । साथ ही इसके रख रखाव का तरीका भी बताते हैं एवम आपको दाँतों की नियमित जाँच के लिए प्रोत्साहित करते हैं ।

हम आप की सेवा के लिए खुश हैं-

यदि आप THE DENTIST को सेवा का मौका देते हैं तो हमें खुशी होगी साथ ही हम आपको देंगे परामर्शशुल्क में आकर्षक छूट   अवम् आपके बच्चों को दाँतों की देख-भाल का निशुल्क प्रशिक्षण । आपकी प्रत्येक मुलाकात में हम आपके दाँतों का पूर्ण परीक्षण करते हुए उनकी सुरक्षा की पूरी जानकारी देंगे । इस प्रकार हम और आप बनाएँगे हमेशा हमेशा के लिए आपकी सुंदर अवम् स्वस्थ मुस्कान

दाँतों की नसों का उपचार (रूट केनाल थेरेपी)

यदि किसी दाँत की नसों मे संक्रमण हो गया है या वो क्षतिग्रस्त हो गई हैं तो हम दाँत निकालने के अलावा इसे नसों के इलाज़ या रूट केनाल थेरपी से बचा सकते हैं । इसमे दाँत के बचाने के 85-90 % उम्मीद होती है । THE DENTIST  प्रत्येक दाँत के स्थिति के अनुसार ही यह निर्णय लिया जाता है कि इसकी नसों का इलाज़ करना चाहिए या नहीं इस निर्णय तक पहुँचने के लिए हम व्यक्ति विशेष की सामान्य परिस्थिति ,उसका स्वास्थ्य ,उस दाँत की स्थिति तथा उपचार के अन्य विकल्पों के बारे में विचारा जाता है ।

नसों के इलाज़ की आवश्यकता क्यूँ ?

प्रत्येक दाँत के अंदर रक्त केशिकायों  अवम् नसों का एक गुथा हुआ जाल होता है । जिसे पल्प कहते हैं । जो इस दाँत को पोषण देता है । जिससे दाँत अंदर से नम ,स्वस्थ अवम् संवेदनशील बना रहता है । लेकिन कभी कभी किसी चोट (रसायनिक या भौतिक ) या ताप की अधिकता या कीटाणु द्वारा दाँत के सड़ने आदि के कारण पल्प में सूजन आ जाती है या पल्प मृत हो जाती है । ऐसी दशा में हमारे पास दाँत को बचाने का एक ही रास्ता होता है – दाँत की नसों का इलाज़ ।

नसों के इलाज़ प्रक्रिया

दाँतों के नसों के इलाज़ में हमें कई चरणों से गुजरना पड़ता हैं । इसके पहले चरण मे हम दाँत के सड़े गले भाग को निकल देते हैं । दूसरे चरण में हम दाँत की जड़ में संक्रमित नसों अवम् रक्त केशिकायों को निकल देते हैं । अब इस नसों वाले रिक्त स्थान को एक पदार्थ से भर देते हैं । अगर इसे अन्य शब्दों मे समझा जाए तो इस पूरी प्रक्रिया में पल्प को निकालकर दाँत को अंदर से साफ अवम् रोगाणुमुक्त कर इसे एक मसाले से भरकर पूर्णतया बंद कर दिया जाता है ।

नसों के इलाज़ के फ़ायदे-

  • दाँतों के नसों के इलाज़ में हम दाँत को उसकी जगह पर बना रहने देते हैं ।
  • इससे किसी भी ख़ालीपन का अहसास नहीं होता ।
  • दाँत की जड़ के पूर्णतया उपस्थित होने की वजह से हड्डी की उँचाई बरकरार रहती है ।
  • दाँत की जड़ के रहने से हमें हमारे खाने की कठोरता का ज्ञान बराबर होता रहता है ।
  • नसों के इलाज़ के बाद सामान्यता उस दाँत को वापिस असली दाँत जैसा आकार देने के लिए हम उस पर धातु या दाँत के रंग क खोल चढ़ा देते है  जिससे वह दाँत अब असली होजाता है ।
  • अगर कोई दाँत अपनी सही आकार में नहीं होता या अपनी सही स्थिति में नहीं होता या घुमा हुआ होता है तो हम उसे भी नसों के इलाज़ से सही कर सकते है ।
  • इस तरह से आपका इलाज़ हुआ दाँत असली जैसा हो जाता है ।

प्रक्रिया मे लगने वाला समय

यह पूर्णतया दाँत के हालत पर निर्भर करता है कि कितना समय लगेगा ? ज़्यादा संक्रमण होने पर ज़्यादा समय लगता है । यह एक या एक से ज़्यादा बार में की जाने वाली प्रक्रिया है । इसमें सामान्यत: प्रत्येक मुलाकात में 30-40 मिनिट का समय लगता है ।

यदि उस दाँत में मवाद जमा हो गई हो तो हमें कई दिनों तक रोज़ उसकी जड़ों की सफाई करने के साथ साथ दवाइयों का भी सहारा लेना पड़ता है ।

नसों के इलाज़ के बाद दाँत को पुन:मजबूती देना-

दाँत की नसों का इलाज़ करने के बाद दाँत अंदर से सुख जाता है । जिससे वो भंगूर हो जाता है तथा उसके टूटने के आसार  बढ़ जाता हैं । इसे पुन: मजबूती देने के लिए इस पर धातु या दाँत के रंग का खोल चढ़ा दिया जाता हैं । जिसे डेंटल कैप भी कहते हैं ।

 

आपके सवाल

प्रत्येक व्यक्ति जो पहली बार दाँतों की नसों का इलाज़ करवाता है ।वह बहुत ही डरा हुआ होता है उसके मन में कई सवाल होते हैं । जैसे-

क्या इस प्रक्रिया में दर्द होता है ?

सामान्यता यह दर्द रहित  प्रक्रिया है । इसमें दाँत तथा इसके आस पास की जगह को एक टीके (इंजेक्शन) से सुन्न कर लिया जाता है ।

इलाज़ के बाद दाँत कितना समय चलेगा या इसकी आयु पर क्या फर्क पड़ता है ?

इलाज़ के बाद आपका दाँत उतना ही चलता है । जितने आपके असली दाँत चलते हैं । यह बहुत बड़ा भ्रम की इस इलाज़ के बाद दाँत पूर्णतया मृत  हो जाता है । जबकि ऐसा नहीं है ,इलाज़ के बाद भी दाँत की जड़ों को आस पास की हड्डी से पोषण मिलता रहता  है  ।  जिससे इसकी आयु में कोई भी अंतर नहीं आता है  ।

क्या इस इलाज़ से दाँत काला पड़ जाएगा आदि ?

दाँत का कालापन कभी भी हमारे लिए चिंता  का विषय नहीं रहता क्यूँकि हम इलाज़ के बाद में इस पर खोल अवश्य चढ़ाते हैं  ।

अन्य विकल्प

नसों के इलाज़ का अन्य विकल्प है कि हम दाँत को ही निकल दें तथा इसकी जगह एक महीने बाद नकली आंशिक बत्तीसी निकालने वाली या फिक्स वाली या दाँत का प्रत्यारोपण करवा सकते हैं  ।

 

दाँत चमकाना (दाँतों को सफेद करना)

एक खुशनुमा सुंदर मुस्कान सबका सपना होता है । जिसे अब THE DENTIST पर उपलब्ध अत्याधुनिक तकनीकों द्वारा आसानी से पाया जा सकता है  ।  दाँतों को सफेद करने या चमकाने के लिए दाँतों पर जमा हुई सारी जमाव हटा दिया जाता है  ।  फिर दाँतों को उन्हे प्राकृतिक  रंग अवम् चमक देने के लिए वीरंजन (ब्लीचिंग ) विधि का उपयोग किया जाता है  ।  जैसे सफेद कपड़ों मेंसफेदी तथा दाग हटाने के लिए वीरंजक का उपयोग होता है  ।  उसी तरह से दाँतों की सफेदी के लिए भी एक वीरंजक का उपयोग किया जाता है  ।

 

दाँतों का रंग

दाँतोंमेंसबसे बाहर एक सफेद परत होती है  ।  जो अंशत: अपारदर्शी या परभासी होती है  ।  इसके नीचे पीली परत होती है  । इसी कारण दाँतों की सफेदी एक विशेष पीलापन लिए हुए होती है  ।  मसूड़ों के पास सफेद परत पतली होने के कारण दाँत थोड़े ज्यादा पीलापन लिए हुए होते हैं  ।बच्चों के गिरने वाले दाँत की बाहरी परत अपारदर्शी होने के कारण उनके दाँत दूधिया रंग के दिखाई देते है  ।

 

दाँत के गहरे रंग के होने के कारण

  1. बाहरी दाग : -दाँतों पर काले ,पीले, हरे-काले,स्लेटी धब्बे हो जाते हैं  । जो दवाओं, चाय, कॉफी, कोला, रेड वाइन, धूम्रपान और स्विमिंग पूल में भी ज़्यादा  अवधि बिताने आदि के कारण हो सकते है ।

 

  1. दाँतों पर स्थित बाहरी सफेद परत का पतले हो जाने से दाँतों की भीतरी पीली परत दिखाई देने लगती है  ।  इसका कारण उम्र बढ़ना ,ज़रूरत से ज्यादा ब्रश करना , पेट मे ज़्यादा तेज़ाब बनाना या ज़्यादा अम्लीय पदार्थों के सेवन आदि हो सकता है  ।

 

  1. कुछ दवाइयाँ भी दाँतों के रंग को बदल देती है  ।  जैसे लौह युक्त दवाइयाँ आदि  ।

 

कैसे पुनः चमकदार सफ़ेद दांत पाएं ?

दाँतों पर जमे बाहरी पदार्थों के जमाव को THE DENTIST केंद्र पर आसानी से मशीन द्वारा हटाया जा सकता है जबकि वीरंजन विधि से इन्हे सफेद बनाया जा सकता है  ।  यदि किसी व्यक्ति के दाँत आंतरिक कारण से सफेद नहीं हैं  ।  तो इन्हे वेनीरिंग (दाँत पर एक सफेद पतली परत चढ़ाना) द्वारा सफेद सही आकार का बनाया जा सकता है  ।

 

वेनीरिंग (दाँत पर सफेद परत चढ़ाना) TOOTH VENEERING, CROWN AND BRIDGE

 

हाँ ,यह बिल्कुल मुमकिन है कि यदि कोई दाँत कहीं से थोड़ा सा झड़ या टूट गया है या दाँत का रंग बदल गया हो तो दाँत पर खोल चढ़ाने के अलावा एक पतली सी परत भी चढ़ाई जा सकती है  ।  जिसकी मोटाई सामान्य: 3-5 मिलीमीटर की होती है  । इसे एक गोंद से दाँत पर चिपका दिया जाता है  ।  इसके लिए दाँत को सुन्न करने की आवश्यकता ना होती है  ।

डेंटल क्राउन (दाँत का खोल)

क्राउन टूटे,भन्गुर या नसों के इलाज़ किए हुए दाँतों पर लगाए जाने वाले धातु या दाँत के रंग के खोल होते हैं  ।  जिन्हे एक गोंद द्वारा चिपका दिया जाता है  ।  यह दाँत को मजबूती अवम् आकार प्रदान करता है  । इस प्रकार इससे मिलती है  – आपको पुन: असली दाँतों जैसी सब कुछ चबाने की आज़ादी  ।

डेंटल ब्रिज (दाँतों का पुल)

जब कभी कोई एक या एक से ज़्यादा दाँत नहीं होते तो उन्हे निकल सकने वाली आंशिक बत्तीसी या स्थाई दाँतों के पुल के द्वारा पुन: प्राप्त किया जा सकता है  ।  जिस तरह पुल केदोनों तरफ दो खंभे होते हैं  । उसी प्रकार से दाँतों का पुल में दो मौजूद दाँतों (दोनो तरफ एक -एक पुल के खंभों की तरह) के सहारे पर तीन दाँतों का पुल बनाया जाता है  ।  इस तीन दाँतों के पुल में एक दाँत गायब दाँत की जगह लेता है तथा दो दाँत डेंटल क्राउन (खोल) की तरह आस-पास के दाँतों पर एक गोंद से चिपका दिए जाते हैं  ।  इस तरह से डेंटल ब्रिज से आपको मिलता है -आपका गायब हुआ दाँत ।

इसे बनाने के लिए पहले आपके दाँतों को (गायब दाँत के दोनो तरफ स्थित ) विशेष आकार दिया जाता है  ।  फिर उसका नाप लेकर उसे लैब मे भेज दिया जात है  ।  दो- तीन दिन मे लैब से हमें आपका डेंटल ब्रिज प्राप्त हो जाता है  ।  जिसे एक गोंद द्वारा तैयार दाँतों पर चिपका दिया जाता है  ।