दाँतों का सफेद रंग

दाँतों में सबसे बाहर एक सफेद परत होती है  ।  जो अंशत: अपारदर्शी या परभासी होती है  ।  इसके नीचे पीली परत होती है  । इसी कारण दाँतों की सफेदी एक विशेष पीलापन लिए हुए होती है  ।  मसूड़ों के पास सफेद परत पतली होने के कारण दाँत थोड़े ज्यादा पीलापन लिए हुए होते हैं  ।बच्चों के गिरने वाले दाँत की बाहरी परत अपारदर्शी होने के कारण उनके दाँत दूधिया रंग के दिखाई देते है  ।

 

दाँत के गहरे रंग के होने के कारण

  1. बाहरी दाग : -दाँतों परकाले ,पीले, हरे-काले,स्लेटी धब्बे हो जाते हैं  । जो दवाओं, चाय, कॉफी, कोला, रेड वाइन, धूम्रपान और स्विमिंग पूल में भी ज़्यादा  अवधि बिताने आदि के कारण हो सकते है ।

 

  1. दाँतों पर स्थित बाहरी सफेद परत का पतले हो जाने से दाँतों की भीतरी पीली परत दिखाई देने लगती है  ।  इसका कारण उम्र बढ़ना ,ज़रूरत से ज्यादा ब्रश करना , पेट मे ज़्यादा तेज़ाब बनाना या ज़्यादा अम्लीय पदार्थों के सेवन आदि हो सकता है  ।

 

  1. कुछ दवाइयाँ भी दाँतों के रंग को बदल देती है  ।  जैसे लौह युक्त दवाइयाँ आदि  ।

 

कैसे पुनः चमकदार सफ़ेद दांत पाएं ?

दाँतों पर जमे बाहरी पदार्थों के जमाव को THE DENTIST केंद्र पर आसानी से मशीन द्वारा हटाया जा सकता है जबकि वीरंजन विधि से इन्हे सफेद बनाया जा सकता है  ।  यदि किसी व्यक्ति के दाँत आंतरिक कारण से सफेद नहीं हैं  ।  तो इन्हे वेनीरिंग (दाँत पर एक सफेद पतली परत चढ़ाना) द्वारा सफेद सही आकार का बनाया जा सकता है  ।

 

वेनीरिंग (दाँत पर सफेद परत चढ़ाना) 

 

हाँ ,यह बिल्कुल मुमकिन है कि यदि कोई दाँत कहीं से थोड़ा सा झड़ या टूट गया है या दाँत का रंग बदल गया हो तो दाँत पर खोल चढ़ाने के अलावा एक पतली सी परत भी चढ़ाई जा सकती है  ।  जिसकी मोटाई सामान्य: 3-5 मिलीमीटर की होती है  । इसे एक गोंद से दाँत पर चिपका दिया जाता है  ।  इसके लिए दाँत को सुन्न करने की आवश्यकता ना होती है  ।