आपके सवाल

१. दाँतों में खड्डे क्यूँ हो जाते हैं ?

हमारे दाँतों की बाहरी परत बहुत ही सख़्त होती है  ।  परन्तु पीछे के दांतों की इस सतह में बहुत से जोड़ होते हैं  ।  जहाँ खाने के फंस जाने से  वहां कीटाणुओं का जमाव हो जाता है  ।  ये  कीटाणु एक अम्ल का स्राव कर  इस  सतह को नरम बना देते हैं  ।  जिससे दांतों में खड्डे हो जाते हैं  ।  जिन्हे दन्त चिकत्सक दांत में भरे जा सकने वाले मसाले से भर कर पुन : ठीक कर देता है  । जैसे चांदी भरना, दांत के रंग का पदार्थ भरना ।

यदि इनका समय रहते इलाज़ नहीं किया जाये तो ये  खड्डे  गहरे  गहरे होते चले जाते हैं ओर कीटाणु और अंदर जाकर दाँत की नसों को नुकसान पहुँचा सकते हैं  ।

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२.दाँतों मे संवेदनशीलता का मतलब क्या है ?

ठंडा-गरम या मीठा पदार्थों से  दाँतों में तीव्र चीस का चलना ही दाँतों का संवेदनशील होना (टूथ सेन्सिटिविटी ) कहलाता है  । यह दाँतों की उपर की सफेद परत के पतले होने पर होता है  । इसे तुरंत प्रभाव से ठीक करवाना चाहिए अन्यथा ये स्थिति गंभीर हो सकती है   ।

३.शुष्क मुँह

मुँह का सुखाना या उसमे लार के कम बनने को ही शुष्क मुँह कहते हैं  ।  लार का बनाना आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत आवशयक है  ।  लार मुँह को साफ रखती है  ।  यह दाँतों में फँसे खाने को निकालने तथा भोजन को पचने के लिए बहुत आवश्यक है  । शुष्क मुँह की स्थिति में मसूड़ों में सूजन ,दाँतों मे सड़न आदि हो सकता है  ।

४.दांत कटाव (टूथ इरोजन) क्या होता है ?

दाँत के उपर सफेद कठोर परत होती है  ।  जो शरीर की पाए जाने वाला सबसे कठोर पदार्थ होता है  ।  इसे इनेमल कहते है ।  केल्शियम इस परत को कठोर बनाए रखता है  ।  लार में केल्शियम पाया जाता है जो इसे कठोरता देता है परंतु कभी कभी अम्लीय तरल पेय पदार्थों जैसे सोडा आधारित पेय,परिरक्षित ज्यूस आदि या पेट में अधिक तेज़ाब बनाना ,खट्टे डकार आना आदि से यह परत पतली हो जाती है अवम् दाँत संवेदनशील अवम् पीले हो जाते हैं  । इसे ही दाँत कटाव कहा जाता है  ।

 

५. बदबूदार साँस या मुँह में से बदबू आने का क्या कारण है ?

– दाँतों में सड़ने की वजह से खड्डे बनाना अवम् उन खड्डों में खाने के सड़ने से  ।

– मसूड़ों अवम् दाँतों के चारों तरफ की हड्डी का गलने की वजह से  ।

– जीभ को साफ ना रखने से  ।

– पेट की बीमारिओं की वजह से  ।

– नाक की बीमारियों की वजह से  ।

– साँस की बीमारी की वजह से या

– कुछ दवाइयों आदि की वजह से  मुँह में से बदबू आ सकती है  ।

 

६ ब्रूक्शिज्म क्या होता है ?

यह बहुत से लोगों की समस्या है  ।  जिसे लोग बहुत ही हल्के में लेते हैं  । इस बीमारी में व्यक्ति विशेष दाँतों को ज़ोर से भींच कर उन्हे ज़ोर ज़ोर से रगड़ते हैं  ।  जैसा कोई गुस्से में दाँत भींचता है  । जब यही एक आदत बन जाती है, तो उसे ब्रूक्शिज्म कहते है. इसका कारण ज़्यादा चिंता आदि होता है  । इसकी वजह से दाँत की लंबाई कम हो जाती है  यानी दाँत छोटे हो जाते हैं तथा कान के पास स्थित जबड़े के जोड़ में भी दर्द होने लगता है  ।  इसके लिए आपका DENTIST (दन्त चिकित्सक) दांतो का कवर बना कर देता है  ।

 

७. हमें साल में कितनी बार अपने दन्त चिकित्सक से मिलना चाहिए ?

आपको साल में दो बार अपने दाँतों की जाँच करवानी चाहिए ताकि हम आपको बीमारी के शुरूवाती समय में ही इसका इलाज़ कर  इससे निजाद दिलवा सके  ।   इसके अलवा साल में दो बार दाँतों की सफाई करवाने से मसूड़ों की बीमारियों से बचा जा सकता है  ।

८. हमें दिन में कितनी बार ब्रश करना चाहिए ?

ये सही है की हमे दिन में कम से कम दो बार ब्रश करना चाहिए  ।  विशेषत: रात का ब्रश ज़्यादा महत्वपूर्ण होता है  ।  रात को खाना  खाने के बाद ब्रश करना चाहिए ।  ज़्यादातर लोग रात को ब्रश नहीं करते या ब्रश करने के बाद फिर कुछ खाकर या दूध वग़ैरा पीते हैं  ।  जबकि हमें रात को ब्रश करने के बाद पानी पीने के अलावा कुछ नहीं खाना चहिये  ।

९. हमें दिन में कितनी बार फ्लॉस करना चाहिए ?

हमे दिन में कम से कम एक बार फ्लॉस अवश्य करना चाहिए ताकि हमारे दाँतों के बीच की सतह की सफाई हो सके  ।

१०. हमें अपना ब्रश कब बदलना कब चाहिए ?

हमें प्रत्येक तीन महीने के बाद अपना ब्रश बदलना चाहिए  ।  हमे कोमल ब्रश ही उपयोग में लेना चाहिए जबकि अगर आप बैटरी वाला ब्रश उपयोग में लेते हैं तो कंपनी द्वारा दिए गये निर्देशों के अनुसार ही ब्रश का सिर बदलना चाहिए  ।

११. किस उम्र में हमें अपने बच्चों के दाँत चिकत्सक को दिखना चाहिए ?

THE DENTIST चाहते हैं कि आपके बच्चों में कभी भी दाँतों की बीमारियाँ ना हों और ना ही वो कभी इस बात से घबराए की डॉक्टर एक निर्दयी इंसान होता है  । जो सभी को दर्द देता हैं  । इसलिए हम आपके बच्चों को देते है एक मनोरंजक वातावरण तथा हम यह भी सलाह देते हैं कि आप अपने बच्चे को उसके पहले जन्मदिन पर हमारे पास लाएँ ताकि हम वही से उसके दाँतों की सुरक्षा कर सके  ।

हम यह भी सलाह देते हैं की गर्भवती महिलाएँ अपने दाँतों की जाँच अवश्य करवाएँ ताकि जच्चा-बच्चा के दाँत सुन्दर बने रहें  ।

 

 

यदि आपके पास इसके अलावा भी दाँतों को लेकर कोई सवाल है तो हमें ई-मेल करें या +91-9929770500 पर whatsapp करें

हम आपके सवालों का खुशी खुशी स्वागत  करते हैं  ।